अनुवाद मनुष्य के जीवन के साथ जुडी हुई एक सहज एवं स्वाभाविक प्रक्रिया है। आज विज्ञान के प्रचार-प्रसार के कारण विश्व नजदीक आ गया है। विशाल विश्व में भिन्न-भिन्न प्रदेश और प्रकृति के कारण विविध भाषाओं का स्वाभाविक निर्माण हुआ है। भिन्न भाषी होने पर भी मनुष्य की एक-दूसरे को समझने की तीव्र इच्छा, अन्य भाषी के सोच-विचार को जानने की जिज्ञासा तथा अपनी बाते दूसरों तक और दूसरों की अपने लोगों तक पहुंचाने की प्रबल कामना से ही अनुदित साहित्य का उदय हुआ है।
यह संचार-क्रांति का युग है जिस तेजी से आज संचार के क्षेत्र में विकास हो रहा है, नित-नए परिवर्तन हो रहे हैं उससे सभी अचंभित है किंतु प्रश्न उठता है कि जनमानस को इस विकास ज्ञान से कैसे परिचित करवाया जाए। यह स्वाभाविक है कि कोई भी भाषा-भाषी इस सूचना ज्ञान को अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही जानना चाहेगा और तभी वह किसी विषय को अच्छी तरह समझ भी सकेंगा। कम्प्यूटर और इंटरनेट के जरिए विश्व सिमटकर हमारे घरों में आ गया है, लेकिन इतने करीब आकर भी अनुवाद के बिना पहुंच अधूरी है।
वर्तमान में इंटरनेट की सूचनाएं हिंदी में उपलब्ध हो रही है जिसके लिए तेजी से प्रयास भी हो रहे हैं। अनुवाद की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है क्योंकि विश्व में प्रत्येक क्षेत्र में हो रहे विकास और नवीनतम खोजो का ज्ञान हमें अनुवाद के माध्यम से हो रहा है।
इसी परिप्रेक्ष्य में ‘यशाचा राजमार्ग ‘मराठी (लेखक डॉ. हनुमंत मारोतीराव भोपाळे) में लिखित किताब का हिंदी में अनुवाद ‘सफलता का राजपथ’ किया गया है।
जीवन में प्रतिदिन हमारे समक्ष अनेक समस्याएं आती है। उसका निराकरण हम कैसे करें। मूल लेखक के भाव, अर्थ, विचार, कथ्य और सामाजिक- सांस्कृतिक संदर्भ एवं शैली को सहज सरल भाषा में यथावत संप्रेषण करने का लघु प्रयास किया गया है। व्यक्ति को अंधकारमय जीवन में रोशनी की किरण दिखाई है। यदि मनुष्य को जीवन में सफल एवं प्रभावशाली व्यक्तित्व का निर्माण करना है तो जैसे उच्च शिक्षा प्रशिक्षण, सकारात्मक विचार, स्वंय सूचना, संतुलित आहार, अध्ययन, सत्संग, योगाभ्यास, दृढ़संकल्प, आत्मविश्वास, आत्मप्रवणता, एकनिष्ठता, ईमानदारी, जूनुन, सकारात्मक दृष्टिकोण एवं जिस क्षेत्र में सफल होना है उसका जूनुन आदि तत्त्वों को स्वंय आत्मसात कर, उस पर वर्चस्व स्थापित करने से प्रभावशाली व्यक्तित्व का निर्माण होता है। व्यक्तित्व विकास के लिए प्रतिदिन समस्याओं का सामना करना पडता है। जीवन संघर्ष में समस्या से विचलित न होकर, बहुत कुछ पीड़ादायक अनुभव सहन कर, सफलता का मार्ग प्रशस्त करना होता है। विपत्तियों से संघर्ष कर, सफल होने से व्यक्तित्व में निखार आता है और तभी समाज कल्याणार्थ प्रत्येक व्यक्ति समर्पित भाव से स्वंय का योगदान दे सकेंगा। ‘सफलता का राजपथ’ यह मराठी से हिंदी अनुवाद की किताब सभी प्राध्यापक, छात्र-छात्राओं, एवं समाज के प्रत्येक पाठकगण के लिए अत्यंत मौलिक एवं उपयोगी सिद्ध होगी साथ ही पाठकगण की मानसिकता सकारात्मक होकर सक्रिय होने में सहायक होंगी। संपूर्णतः पाठक के व्यक्तित्व विकास और मन को विचलित करनेवाली अनेक समस्याओं का समाधान करने के लिए ‘सफलता का राजपथ’ यह किताब निश्चित ही मार्गदर्शक एवं पथप्रदर्शक साबित होगी।
~ डॉ. सुनीता शिवशंकर बुंदेले





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