‘गपशप (किस्से किचन के)’ बाल पाठकों के लिए रची गई ऐसी ही रोचक, मनोरंजक और ज्ञानवर्धक चित्रात्मक कविताओं का संग्रह है, जिसमें रसोई के उपकरण स्वयं बोलते हैं और बच्चों से अपनी गपशप करते हैं।
कभी मटका अपनी शीतलता का गुण बताता है, कभी कद्दूकस अपने तीखे दाँतों का कमाल दिखाता है, तो कभी मथनी अपने पुराने दिनों की याद सुनाती है। कहीं देगची अपने पारंपरिक रूप पर गर्व करती है, तो कहीं प्रेशर कुकर समय और ईंधन बचाने की बात करता है। इस तरह परंपरागत और आधुनिक रसोई के उपकरण एक साथ इस गपशप में शामिल होते हैं।
इन कविताओं के माध्यम से बच्चों को रसोई की वस्तुओं के नाम, आकार, उपयोग, विशेषताओं और हमारे जीवन में उनके महत्व की सहज जानकारी मिलती है। साथ ही भारतीय रसोई, खान-पान, लोकजीवन और बदलते समय की झलक भी दिखाई देती है।
सरल भाषा, सहज लय, हास्य, मानवीकरण और चित्रात्मकता इस संग्रह को बच्चों के लिए रोचक बनाते हैं। कविताएँ उन्हें केवल पढ़ने का आनंद ही नहीं देतीं, बल्कि अपने आसपास की साधारण वस्तुओं को ध्यान से देखने, उनके बारे में सोचने और उनमें छिपी कहानी खोजने की प्रेरणा भी देती हैं।





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