‘अनवरत यात्राएँ’ लेखिका के जीवन के आरंभ से अब तक की यात्रा का दर्पण है, जहाँ उन्होंने अपने बीते कल को वर्तमान की खिड़की से झाँककर देखा है। यह केवल घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि उन अनुभवों, भावनाओं, रिश्तों, संघर्षों और स्मृतियों की यात्रा है जिन्होंने उन्हें आज वह बनाया है जो वह हैं। बचपन की निश्छल यादों से लेकर जीवन के बदलते पड़ावों तक, यह संग्रह उस भीतरी यात्रा को शब्द देता है जिसे उन्होंने जिया तो पूरा, पर शायद कभी कह नहीं पाईं।
इस यात्रा में सबसे गहरी छाप उनके पिता की है, उनकी सोच, संस्कार और दृष्टि में पिता की ही झलक दिखती है। उनके कंधों पर बैठकर दुनिया देखना, उनकी साइकिल पर रास्ते पार करना और उनकी डाँट में छिपा स्नेह आज भी स्मृतियों में जीवंत है। इसलिए यह पुस्तक केवल कविता-संग्रह नहीं, बल्कि पिता की सतत उपस्थिति का दस्तावेज़ है, उन हाथों की यात्रा है जिन्होंने थामा, उन कंधों की जिन्होंने ऊँचाई दी और उस विश्वास की जिसने अपने पैरों पर चलना सिखाया।





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