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Bharat Varsh ke pracheen sikke aur meri samajseva

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नमस्कार, मैं श्री अविनाश निराताई चिंतामण म्हात्रे हूँ। मेरा जन्मस्थान करावे, नवी मुंबई है और वर्तमान में मैं अंबरनाथ में रहता हूँ। मेरे पिता डॉ. चिंतामण रामदास म्हात्रे एक वरिष्ठ समाजसेवक, कुष्ठमित्र हैं जिन्हें अनेक प्रतिष्ठित सामाजिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, और मेरी माता स्वर्गीय सौ. निराताई चिंतामण म्हात्रे भी समाजसेविका थीं। उन्हें दोनों के सामाजिक कार्यों की विरासत के कारण मैं भी समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूँ।

स्वर्गीय सौ. निराताई को प्राचीन सिक्कों का संग्रह करने का बहुत शौक था, लेकिन 3 अक्टूबर 2008 को उन्हें अचानक हृदयाघात हुआ और उनका स्वर्गवास हो गया, जो हमारे लिए अत्यंत दुःखद घटना थी। समाजसेवा करते हुए मुझे अनेक सामाजिक अंतरराष्ट्रीय (सिंगापुर और थाईलैंड) तथा राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। समाज कार्य के दौरान विभिन्न स्थानों पर जाने के अनुभव मिले और उसी के साथ माँ के संग्रह के सिक्कों को मैंने स्मृति के रूप में संभालकर रखा है।

इन सिक्कों को सुरक्षित रखते हुए मैंने कई प्राचीन सिक्कों की खोज करने का भी प्रयास किया है। इस शौक के कारण कई दुर्लभ राजाओं के समय, काल, स्थान, उस समय की राजनीतिक व्यवस्था, पुराने प्रचलित सिक्के, राजवंश, शासन पद्धति, व्यापार, कला, सामाजिक जीवन और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी अनेक बातों की जानकारी मिली। आज मेरे पास अत्यंत दुर्लभ ऐसे अनेक सिक्कों का संग्रह है।

मैंने केवल इन सिक्कों को सहेज कर ही नहीं रखा, बल्कि उनकी जानकारी को लोगों तक विभिन्न माध्यमों के द्वारा पहुँचाने का प्रयत्न भी किया, जिससे मेरे साथ-साथ अन्य लोगों के ज्ञान में भी वृद्धि हुई। कुछ सिक्के तो 2000 से 3000 हजार वर्ष पुराने हैं और आज मेरे संग्रह में अनेक नाणी (सिक्के) सुरक्षित हैं, जिससे मुझे अत्यधिक आनंद का अनुभव होता है। कई दुर्लभ सिक्के सोने-चाँदी और अन्य धातुओं के हैं, लेकिन मेरे लिए सोना-चाँदी या धातु का मूल्य महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि ऐसे दुर्लभ सिक्कों का संग्रहीत होना ही अधिक महत्त्वपूर्ण और आनंददायी है।

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