यह संग्रह आधुनिक जीवन की उन सूक्ष्म किन्तु प्रभावशाली घटनाओं एवं अनुभवों को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत करता है, जो आज के भागदौड़ भरे जीवन में कभी गंभीर तो कभी हास्यप्रद प्रतीत होती हैं।मोबाइल और तकनीक पर केंद्रित कविताएँ — जैसे एआई (AI), ब्लूटूथ, आधुनिक ईयरफोन, स्किप कर जाते हैं, सेल्फ़ी, मोबाइल पर नाराज़गी, मेरे दादा गूगल सिंह — एक नवीन दृष्टिकोण के साथ लिखी गई हैं, जो पाठकों को मुस्कान के साथ सोचने को भी प्रेरित करती हैं।’शुभ रंग है’, ‘निर्धन व्यक्ति को दान’ जैसी रचनाएँ आधुनिक टीवी चैनलों पर आने वाले ज्योतिषीय टोटकों और अंधविश्वास पर करारा व्यंग्य करती हैं।’पति से करोड़पति’, ‘पत्नी की पाठशाला’, ‘कपड़ों की नेता’, ‘मेड दे दो सबसे अच्छी’ जैसी कविताओं में पति-पत्नी के रिश्तों की मीठी-नोकझोंक और पारिवारिक जीवन के हास्यप्रद क्षणों को नई दृष्टि से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया गया है।’आओ समय बर्बाद करें’ – यह एक ऐसी व्यंग्यात्मक रचना है जो समय के अपव्यय पर करारा प्रहार करती है। वहीं, ‘सुबह देर से उठने के लाभ’ और ‘मोटापा दिवस’ जैसी कविताएँ हास्य और व्यंग्य के माध्यम से स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश देती हैं। इस संग्रह के माध्यम से मेरा उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि समाज की कुछ विसंगतियों और आदतों पर मुस्कराते हुए प्रश्न उठाना भी है।
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