यह पुस्तक हिमाचल के ट्रांस-गिरी क्षेत्र में बसे हट्टी समुदाय की अनोखी संस्कृति और जीवन-शैली का जीवंत चित्रण करती है। पहाड़ों की गोद में बसी इस जनजाति की राजसी ऐतिहासिक विरासत से लेकर आधुनिक संघर्षों तक की पूरी यात्रा को गहराई से उकेरा गया है। पुस्तक का मुख्य केंद्र हट्टी महिलाओं की भूमिका और जोडिदारा प्रथा (जिसे स्थानीय भाषा में ‘जजदा’ तथा लोकप्रिय रूप से द्रौपदी प्रथा भी कहा जाता है) है। यह प्रथा बहुपतित्व (fraternal polyandry) की एक दुर्लभ और प्राचीन व्यवस्था है, जिसमें एक महिला एक साथ कई भाइयों की पत्नी होती है। भूमि के खंड-खंड विभाजन को रोकने, परिवार की एकता बनाए रखने, आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और श्रम की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से इस प्रथा का विकास हुआ।
पुस्तक जोडिदारा प्रथा के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक-आर्थिक कारणों, महिलाओं पर इसके प्रभाव, उनकी सशक्त भूमिका तथा आधुनिक समय में इस परंपरा के सामने आने वाली चुनौतियों और परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डालती है। समुदाय की सामाजिक संरचना, त्योहारों में महिलाओं का नेतृत्व, विवाह रीतियाँ और परंपरा व आधुनिकता के बीच संतुलन साधती नई हट्टी महिला की उभरती पहचान को भी रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।यह पुस्तक हट्टी समाज की सबसे अनकही सच्चाई बहुपतित्व प्रथा को केंद्र में रखकर समुदाय की पूरी संस्कृति को समझने का एक गहन और भावुक सामाजिक दस्तावेज है।





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