“मन वीणा के तार” मनजीत शर्मा ‘मीरा’ का गीत-संग्रह है, जिसमें 151 रचनाएँ संकलित हैं। यह संग्रह लेखिका की आंतरिक साधना, आत्म-संवाद और रचनात्मक यात्रा का परिणाम है। हिमाचल की वादियों, ऊना की स्वां नदी और गाँवों के प्राकृतिक परिवेश ने इन गीतों की संवेदनाओं को गढ़ा है। इसलिए इन रचनाओं में पहाड़ों की दृढ़ता और नदियों की तरलता दोनों का संगम दिखाई देता है। आज के तेज़ और मशीनी युग में जब संवाद घट रहा है, लेखिका ने शास्त्रीय अनुशासन – बहर और छंद को अपनाकर गीतों को लय और सुकून से भरने का प्रयास किया है। इस संग्रह में माँ की ममता, पीहर की स्मृतियाँ, प्रेम और करुणा के साथ-साथ सामाजिक विसंगतियाँ, युद्ध की पीड़ा और शांति की चाह को भी गहराई से व्यक्त किया गया है।
यह पुस्तक केवल व्यक्तिगत भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समय और समाज का जीवंत दस्तावेज़ भी है। प्रत्येक गीत लेखिका के जिए हुए अनुभवों से उपजा है और पाठक के मन को स्पर्श करने की क्षमता रखता है।





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