“मेरे जज़्बात” डॉ. अमित जसूजा की तीसरी किताब है। यह उनके दिल में बसे उन एहसासों का संग्रह है, जिन्हें उन्होंने शब्दों में ढालने की एक छोटी-सी कोशिश की है। कुछ बातें कही नहीं जातीं, सिर्फ़ महसूस की जाती हैं।
इस किताब में पाठकों को प्रेम, दर्द, ख़ुशी, यादें, रिश्ते और उम्मीद इन सभी भावनाओं की झलक मिलेगी। हर पन्ना लेखक के मन की किसी न किसी परत को सामने लाता है।
डॉ. जसूजा की यही उम्मीद है कि उनके शब्दों में पाठकों को अपना कोई एहसास, अपनी कोई कहानी या अपने दिल की कोई आवाज़ मिल जाए।





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