यह किताब नन्ही लेखिका राध्या व्यास की कल्पनाओं और मासूम एहसासों का संग्रह है। नाना-नानी से कहानियाँ सुनते-सुनते कब उसके मन में खुद कहानियाँ बुनने का शौक जाग गया, पता ही नहीं चला। उसकी कहानियों में बचपन की वही सच्ची और भोली दुनिया झलकती है।
सरल और दिल को छू लेने वाले शब्दों में लिखी गई ये कहानियाँ छोटी-छोटी खुशियों, भावनाओं और जिज्ञासाओं को सामने लाती हैं, जिन्हें हम बड़े होकर अक्सर भूल जाते हैं।





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