‘त्रिविधा’ उन विलक्षण साधिकाओं को समर्पित पुस्तक है, जिन्होंने गायन, वादन और नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति को नई ऊँचाइयों प्रदान कीं।
इस पुस्तक में हिन्दुस्तानी और कर्नाटक संगीत की महान कलाकारों के जीवन वृत्तांत, गुरु-परंपरा, कलात्मक दृष्टि और सांस्कृतिक योगदान का संवेदनशील एवं शोधपरक परिचय प्रस्तुत किया गया है।
‘त्रिविधा’ भारतीय शास्त्रीय कलाओं की उस अखंड परंपरा को नमन है, जो आज भी सुर, ताल, लय और नृत्य के माध्यम से हमारे सांस्कृतिक जीवन को आलोकित कर रही है।





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