विश्व में जहाँ-जहाँ भी भारतीय मूल के लोग बसे हुए हैं वहाँ-वहाँ हिन्दी भाषा भी स्वतः ही पहुँच गयी है । भारत से दूर विदेशी धरती पर भारतीय मूल के लोगों ने भारतीय सभ्यता, संस्कृति एवं भाषा को जीवित रखा है । इन्हीं लोगों का यह प्रयास है कि हिन्दी भाषा आज लगभग समस्त विश्व में पहुँच चुकी है । हिन्दी भाषा विकास में पत्रकारिता का योगदान सराहनीय है ।
प्रवासी हिन्दी पत्रकारिता विषय पर अध्ययन करने से मुझे यह ज्ञात हुआ कि हिन्दी भाषा एवं पत्रकारिता के विकास में अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के संदर्भ में तटस्थ आलोचनात्मक अध्ययन का अभाव रहा है । इस दृष्टि से तटस्थ होकर गवेषणात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन कर विचार प्रस्तुत करना मेरे अध्ययन का मुख्य लक्ष्य रहा है । हिन्दी पत्रकारिता विषय पर गहन चिंतन मनन तथा तथ्यों, तर्कों एवं आँकड़ों की कसौटी पर हिन्दी की शक्ति, सामर्थ्य एवं विकास की क्षमता व भविष्य की संभावनाओं पर अध्ययन किया गया है ।
प्रस्तुत पुस्तक में विदेशों में हिन्दी पत्रकारिता का उन्नयन एवं विकास तथा विदेशों से प्रकाशित हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं का परिचय एवं उनके कार्यों का विश्लेषण एवं हिन्दी भाषा के अंतरराष्ट्रीय विकास में उनके योगदान का समीक्षात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है ।
प्रवासी हिन्दी पत्रकारिता का अध्ययन करते हुए यह ज्ञात हुआ कि आज इंटरनेट व पत्रिकाओं में उपलब्ध प्रवासी भारतीय साहित्यकारों के लेखन कार्य द्वारा यह ज्ञात होता है कि विदेशी भूमि पर हिन्दी पत्रकारिता का विकास, उन्नत सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति तथा निरन्तर हिन्दी भाषा सेवा कार्य से अधिक गतिशील हो रहा है ।
इंटरनेट पर उपलब्ध अनेक पत्र-पत्रिकाएँ प्रवासी भारतीय साहित्यकारों के कारण ही स्तरीय भाषा शैली में हिन्दी साहित्य उपलब्ध करा रही हैं ।
हिन्दी भाषा की शब्द सम्पन्नता एवं ग्रहणशीलता के गुण के कारण ही आज हिन्दी पत्रकारिता विश्व में निरन्तर विभिन्न स्तरों पर स्वीकारी जा रही है फिर चाहे वह सायबर मीडिया हो, मनोरंजन क्षेत्र हो या हिन्दी की पत्र-पत्रिकाएँ एवं विज्ञापनों की भाषा हो । हिन्दी प्रत्येक स्तर पर अपना परचम लहरा रही है । विश्व में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और लोकप्रियता का विश्लेषण परिणाम, हिन्दी को एक ऊर्जापूर्ण भविष्य की ओर ले जा रहा है ।
प्रस्तुत पुस्तक को 5 अध्यायों में विभाजित किया गया है । पुस्तक में हिन्दी पत्रकारिता का स्वरूप एवं परिचय, परिभाषाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है । विदेशों में हिन्दी पत्रकारिता का उन्नयन एवं विकास किस प्रकार हुआ है, इसका शोधात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है । विदेशों से प्रकाशित हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं का परिचय एवं उनके कार्यों का विश्लेषण किया गया है । हिन्दी भाषा के अंतरराष्ट्रीय विकास में पत्र-पत्रिकाओं के योगदान का समीक्षात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है । अंत में ‘उपसंहार’ के अंतर्गत सभी अध्यायों का संक्षिप्त वर्णन करते हुए शोध कार्य की समीक्षा व मूल्यांकन करने का प्रयास किया गया है । प्रत्येक अध्याय को बिंदुओं के आधार पर सूक्ष्म चिंतन तथा सटीक व तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ प्रस्तुत किया गया है ।
प्रत्येक अध्याय के अंतर्गत संदर्भ अनुक्रम को यथासंभव लिखने का मेरा प्रयास रहा है । परिशिष्ट के अंतर्गत संदर्भ ग्रंथ, सहायक ग्रंथ, पत्र-पत्रिकाएँ, शब्दकोश एवं वेबसाइट्स की सूची प्रस्तुत की गई है जो शोध कार्य हेतु मेरे सहायक रहे हैं ।
~ डॉ. ऋतु वर्मा





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