“मन मेरा ऋतुराज” मनजीत शर्मा ‘मीरा’ का गीत-संग्रह है। यह उनकी साहित्यिक यात्रा का तीसरा महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो “ऐसे गीत सुनाने होंगे” की सामाजिक सजगता और “मन वीणा के तार” की आत्मिक झंकार के बाद आया है।
इस संग्रह में प्रकृति, प्रेम, स्मृति और मानवीय संवेदनाओं को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। हिमाचल की वादियों, ऊना की स्वाँ नदी और गाँवों के परिवेश ने लेखिका की लेखनी को गढ़ा है, इसलिए इन गीतों में पहाड़ों की दृढ़ता और नदियों की तरलता दोनों दिखाई देती हैं।
लेखिका के अनुसार गीत केवल तुकबंदी नहीं, बल्कि हृदय की वह पुकार है जो लय के साथ कागज़ पर उतरती है। इस संग्रह में भाव, लय और भाषा का संतुलन है। प्रेम की मदिरा के साथ जीवन के कठोर सत्य, बचपन की स्मृतियाँ, आध्यात्मिक चेतना और दुःख-सुख के अनुभवों को भी स्वर मिला है। “बेबी शावर” जैसा गीत परिवार में आए नए सदस्य के स्वागत का उल्लास दर्शाता है।





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