ये कहानी है एक गृहणी की, जिसने सभी गृहणियों को या फिर स्त्रियों को अपने जीवन में कड़ा संघर्ष करते हुए ही देखा था, जिससे सभी के जीवन में दुःख और अशांति के काले बादल छाए हुए थे। और वो सभी उसी को अपना जीवन मान चुकी थीं। परंतु ये एक ऐसी स्त्री बनना चाहती थी जो खुद में सक्षम हो। सक्षम केवल घर के या बाहर के काम करने में नहीं, बल्कि सक्षम अपने जीवन में शांति और प्रेम लाने में। सक्षम हर एक परिस्थिति में डटकर खड़े रहकर अपने साहस, धैर्य, सहनशीलता और शांतिपूर्ण व्यवहार का परिचय देने में।
ये एक कहानी है उस स्त्री की, जो ये देखना चाहती थी कि उसमें कितने और क्या-क्या हुनर हैं। उसे अपने पंखों को पसारकर खुद को गगन में उड़ते हुए देखना था। उसे अपने चारों तरफ बनाई दीवार को तोड़कर बस बाहर निकलना था।
ये कहानी है एक स्त्री की “यात्रा” की, जिसने अपने जीवन से सारी नकारात्मकता को निकालकर एक सकारात्मक जीवन जीने की ओर कदम बढ़ाया।





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